महाभारत 6.65.20
एवमुक्तस्ततो द्रोणस्तव पुत्रेण मारिषअभिनत्पाण्डवानीकं प्रेक्षमाणस्य सात्यकेः
evamuktastato droṇastava putreṇa māriṣaabhinatpāṇḍavānīkaṃ prekṣamāṇasya sātyakeḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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