महाभारत 6.65.28
शिखण्डिनं समासाद्य भरतानां पितामहःअवर्जयत संग्रामे स्त्रीत्वं तस्यानुसंस्मरन्
śikhaṇḍinaṃ samāsādya bharatānāṃ pitāmahaḥavarjayata saṃgrāme strītvaṃ tasyānusaṃsmaran
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें