महाभारत 6.67.11
श्रुत्वा गाण्डीवनिर्घोषं विस्फूर्जितमिवाशनेःसर्वसैन्यानि भीतानि व्यवलीयन्त भारत
śrutvā gāṇḍīvanirghoṣaṃ visphūrjitamivāśaneḥsarvasainyāni bhītāni vyavalīyanta bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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