महाभारत 6.67.13
मद्रसौवीरगान्धारैस्त्रिगर्तैश्च विशां पतेसर्वकालिङ्गमुख्यैश्च कलिङ्गाधिपतिर्वृतः
madrasauvīragāndhāraistrigartaiśca viśāṃ patesarvakāliṅgamukhyaiśca kaliṅgādhipatirvṛtaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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