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महाभारत 6.67.29
सूर्यवर्णैश्च निस्त्रिंशैः पात्यमानानि सर्वशःदिक्षु सर्वास्वदृश्यन्त शरीराणि शिरांसि च
sūryavarṇaiśca nistriṃśaiḥ pātyamānāni sarvaśaḥdikṣu sarvāsvadṛśyanta śarīrāṇi śirāṃsi ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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