महाभारत 6.67.32
शराहता भिन्नदेहा बद्धयोक्त्रा हयोत्तमाःयुगानि पर्यकर्षन्त तत्र तत्र स्म भारत
śarāhatā bhinnadehā baddhayoktrā hayottamāḥyugāni paryakarṣanta tatra tatra sma bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें