महाभारत 6.67.39
रथेषु च रथान्युद्धे संसक्तान्वरवारणाःविकर्षन्तो दिशः सर्वाः संपेतुः सर्वशब्दगाः
ratheṣu ca rathānyuddhe saṃsaktānvaravāraṇāḥvikarṣanto diśaḥ sarvāḥ saṃpetuḥ sarvaśabdagāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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