महाभारत 6.68.7
माद्रीपुत्रस्तु नकुलः शूरः संक्रन्दनो युधित्रिगर्तानां रथोदारैः समसज्जत पाण्डवः
mādrīputrastu nakulaḥ śūraḥ saṃkrandano yudhitrigartānāṃ rathodāraiḥ samasajjata pāṇḍavaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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