महाभारत 6.69.24
सत्यव्रतं च सप्तत्या विद्ध्वा शक्रसमो युधिनृत्यन्निव रणे वीर आर्तिं नः समजीजनत्
satyavrataṃ ca saptatyā viddhvā śakrasamo yudhinṛtyanniva raṇe vīra ārtiṃ naḥ samajījanat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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