महाभारत 6.69.35
तामापतन्तीं सहसा घोररूपां दुरासदाम्अभिमन्युः शरैस्तीक्ष्णैश्चिच्छेद भुजगोपमाम्
tāmāpatantīṃ sahasā ghorarūpāṃ durāsadāmabhimanyuḥ śaraistīkṣṇaiściccheda bhujagopamām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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