महाभारत 6.7.32
गन्धमादनशृङ्गेषु कुबेरः सह राक्षसैःसंवृतोऽप्सरसां संघैर्मोदते गुह्यकाधिपः
gandhamādanaśṛṅgeṣu kuberaḥ saha rākṣasaiḥsaṃvṛto'psarasāṃ saṃghairmodate guhyakādhipaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें