महाभारत 6.7.7दक्षिणेन तु नीलस्य निषधस्योत्तरेण चप्रागायतो महाराज माल्यवान्नाम पर्वतःdakṣiṇena tu nīlasya niṣadhasyottareṇa caprāgāyato mahārāja mālyavānnāma parvataḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें