महाभारत 6.70.35
अवहारं ततश्चक्रे पिता देवव्रतस्तवसंध्याकाले महाराज सैन्यानां श्रान्तवाहनः
avahāraṃ tataścakre pitā devavratastavasaṃdhyākāle mahārāja sainyānāṃ śrāntavāhanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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