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महाभारत 6.70.6
तांस्तु सर्वान्महेष्वासान्सात्यकिः सत्यविक्रमःजघान परमेष्वासो दिव्येनास्त्रेण वीर्यवान्
tāṃstu sarvānmaheṣvāsānsātyakiḥ satyavikramaḥjaghāna parameṣvāso divyenāstreṇa vīryavān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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