महाभारत 6.71.7
सौभद्रो द्रौपदेयाश्च राक्षसश्च घटोत्कचःसात्यकिर्धर्मराजश्च व्यूहग्रीवां समास्थिताः
saubhadro draupadeyāśca rākṣasaśca ghaṭotkacaḥsātyakirdharmarājaśca vyūhagrīvāṃ samāsthitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें