महाभारत 6.74.28
तैश्चापि विद्धः शुशुभे रुधिरेण समुक्षितःगिरिप्रस्रवणैर्यद्वद्गिरिर्धातुविमिश्रितैः
taiścāpi viddhaḥ śuśubhe rudhireṇa samukṣitaḥgiriprasravaṇairyadvadgirirdhātuvimiśritaiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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