महाभारत 6.74.2एकीभूताः पुनश्चैव तव पुत्रा महारथाःसमेत्य समरे भीमं योधयामासुरुद्यताःekībhūtāḥ punaścaiva tava putrā mahārathāḥsametya samare bhīmaṃ yodhayāmāsurudyatāḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें