महाभारत 6.74.30
ततो गाण्डीवनिर्घोषः प्रादुरासीद्विशां पतेदक्षिणेन वरूथिन्याः पार्थस्यारीन्विनिघ्नतः
tato gāṇḍīvanirghoṣaḥ prādurāsīdviśāṃ patedakṣiṇena varūthinyāḥ pārthasyārīnvinighnataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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