महाभारत 6.74.32
शोणितोदं रथावर्तं गजद्वीपं हयोर्मिणम्रथनौभिर्नरव्याघ्राः प्रतेरुः सैन्यसागरम्
śoṇitodaṃ rathāvartaṃ gajadvīpaṃ hayormiṇamrathanaubhirnaravyāghrāḥ prateruḥ sainyasāgaram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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