महाभारत 6.75.3
अयं स कालः संप्राप्तो वर्षपूगाभिकाङ्क्षितःअद्य त्वां निहनिष्यामि यदि नोत्सृजसे रणम्
ayaṃ sa kālaḥ saṃprāpto varṣapūgābhikāṅkṣitaḥadya tvāṃ nihaniṣyāmi yadi notsṛjase raṇam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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