महाभारत 6.75.40
तं दृष्ट्वा छिन्नधन्वानं शतानीकः सहोदरम्अभ्यपद्यत तेजस्वी सिंहवद्विनदन्मुहुः
taṃ dṛṣṭvā chinnadhanvānaṃ śatānīkaḥ sahodaramabhyapadyata tejasvī siṃhavadvinadanmuhuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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