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महाभारत 6.75.4
अद्य कुन्त्याः परिक्लेशं वनवासं च कृत्स्नशःद्रौपद्याश्च परिक्लेशं प्रणोत्स्यामि हते त्वयि
adya kuntyāḥ parikleśaṃ vanavāsaṃ ca kṛtsnaśaḥdraupadyāśca parikleśaṃ praṇotsyāmi hate tvayi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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