महाभारत 6.75.56
मुहूर्तास्तमिते सूर्ये चक्रुर्युद्धं सुदारुणम्रथिनः सादिनश्चैव व्यकीर्यन्त सहस्रशः
muhūrtāstamite sūrye cakruryuddhaṃ sudāruṇamrathinaḥ sādinaścaiva vyakīryanta sahasraśaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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