महाभारत 6.75.7याचमानं च यन्मोहाद्दाशार्हमवमन्यसेउलूकस्य समादेशं यद्ददासि च हृष्टवत्yācamānaṃ ca yanmohāddāśārhamavamanyaseulūkasya samādeśaṃ yaddadāsi ca hṛṣṭavatइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें