महाभारत 6.77.13
रथैरनेकसाहस्रैः समन्तात्परिवारितम्अश्ववृन्दैर्महद्भिश्च ऋष्टितोमरधारिभिः
rathairanekasāhasraiḥ samantātparivāritamaśvavṛndairmahadbhiśca ṛṣṭitomaradhāribhiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें