महाभारत 6.77.39
देवा देवर्षयश्चैव गन्धर्वाश्च महोरगाःविस्मयं परमं जग्मुर्दृष्ट्वा कृष्णौ तथागतौ
devā devarṣayaścaiva gandharvāśca mahoragāḥvismayaṃ paramaṃ jagmurdṛṣṭvā kṛṣṇau tathāgatau
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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