महाभारत 6.77.7
एते चान्ये च बहवस्त्वदर्थे त्यक्तजीविताःदेवानपि रणे जेतुं समर्था इति मे मतिः
ete cānye ca bahavastvadarthe tyaktajīvitāḥdevānapi raṇe jetuṃ samarthā iti me matiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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