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महाभारत 6.78.30
ततः शरसहस्राणि बहूनि भरतर्षभप्रेषयामास समरे द्रौणिः परमकोपनः
tataḥ śarasahasrāṇi bahūni bharatarṣabhapreṣayāmāsa samare drauṇiḥ paramakopanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंततः शरसहस्राणि बहूनि भरतर्षभप्रेषयामास समरे द्रौणिः परमकोपनः
tataḥ śarasahasrāṇi bahūni bharatarṣabhapreṣayāmāsa samare drauṇiḥ paramakopanaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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