महाभारत 6.78.49
शकुनिस्तं समभ्येत्य राजगृद्धी महाबलःराजानं सर्वलोकस्य रथमारोपयत्स्वकम्
śakunistaṃ samabhyetya rājagṛddhī mahābalaḥrājānaṃ sarvalokasya rathamāropayatsvakam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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