महाभारत 6.79.28
तेन विद्राव्यमाणास्ते पाण्डवाः सर्वतोदिशम्त्रातारं नाभ्यविन्दन्त स्वेष्वनीकेषु भारत
tena vidrāvyamāṇāste pāṇḍavāḥ sarvatodiśamtrātāraṃ nābhyavindanta sveṣvanīkeṣu bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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