महाभारत 6.80.32
तथैव शकुनिः शूरः स्यालस्तव विशां पतेआरोपयद्रथं तूर्णं गौतमं रथिनां वरम्
tathaiva śakuniḥ śūraḥ syālastava viśāṃ pateāropayadrathaṃ tūrṇaṃ gautamaṃ rathināṃ varam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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