महाभारत 6.82.3
ततः सरथनागाश्वाः समकम्पन्त सृञ्जयाःमृत्योरास्यमनुप्राप्तं मेनिरे च युधिष्ठिरम्
tataḥ sarathanāgāśvāḥ samakampanta sṛñjayāḥmṛtyorāsyamanuprāptaṃ menire ca yudhiṣṭhiram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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