महाभारत 6.83.24
ततः शूराः समासाद्य समरे ते परस्परम्नेत्रैरनिमिषै राजन्नवैक्षन्त प्रकोपिताः
tataḥ śūrāḥ samāsādya samare te parasparamnetrairanimiṣai rājannavaikṣanta prakopitāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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