महाभारत 6.85.27
ततो भीमो रणे क्रुद्धो रभसश्च विशेषतःगजानीकं समासाद्य प्रेषयामास मृत्यवे
tato bhīmo raṇe kruddho rabhasaśca viśeṣataḥgajānīkaṃ samāsādya preṣayāmāsa mṛtyave
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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