महाभारत 6.85.28
तत्र भारत भीमेन नाराचाभिहता गजाःपेतुः सेदुश्च नेदुश्च दिशश्च परिबभ्रमुः
tatra bhārata bhīmena nārācābhihatā gajāḥpetuḥ seduśca neduśca diśaśca paribabhramuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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