महाभारत 6.86.2
तथैव सात्वतो राजन्हार्दिक्यः परवीरहाअभ्यद्रवत संग्रामे पाण्डवानामनीकिनीम्
tathaiva sātvato rājanhārdikyaḥ paravīrahāabhyadravata saṃgrāme pāṇḍavānāmanīkinīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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