महाभारत 6.86.38इरावानपि खड्गेन दर्शयन्पाणिलाघवम्अभ्यवर्तत तान्सर्वान्सौबलान्बलदर्पितःirāvānapi khaḍgena darśayanpāṇilāghavamabhyavartata tānsarvānsaubalānbaladarpitaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें