महाभारत 6.86.55
आद्रवन्तमभिप्रेक्ष्य राक्षसं युद्धदुर्मदम्इरावान्क्रोधसंरब्धः प्रत्यधावन्महाबलः
ādravantamabhiprekṣya rākṣasaṃ yuddhadurmadamirāvānkrodhasaṃrabdhaḥ pratyadhāvanmahābalaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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