महाभारत 6.86.56
समभ्याशगतस्याजौ तस्य खड्गेन दुर्मतेःचिच्छेद कार्मुकं दीप्तं शरावापं च पञ्चकम्
samabhyāśagatasyājau tasya khaḍgena durmateḥciccheda kārmukaṃ dīptaṃ śarāvāpaṃ ca pañcakam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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