महाभारत 6.86.71
तस्मिंस्तु निहते वीरे राक्षसेनार्जुनात्मजेविशोकाः समपद्यन्त धार्तराष्ट्राः सराजकाः
tasmiṃstu nihate vīre rākṣasenārjunātmajeviśokāḥ samapadyanta dhārtarāṣṭrāḥ sarājakāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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