महाभारत 6.86.80
तत्र भारत भीष्मस्य रणे दृष्ट्वा पराक्रमम्अत्यद्भुतमपश्याम शक्रस्येव पराक्रमम्
tatra bhārata bhīṣmasya raṇe dṛṣṭvā parākramamatyadbhutamapaśyāma śakrasyeva parākramam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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