महाभारत 6.87.17
तेषु प्रक्षीयमाणेषु भग्नेषु गजयोधिषुदुर्योधनो महाराज राक्षसान्समुपाद्रवत्
teṣu prakṣīyamāṇeṣu bhagneṣu gajayodhiṣuduryodhano mahārāja rākṣasānsamupādravat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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