महाभारत 6.89.25गजवाजिमनुष्याणां शोणितान्त्रतरङ्गिणीप्रावर्तत नदी तत्र केशशैवलशाद्वलाgajavājimanuṣyāṇāṃ śoṇitāntrataraṅgiṇīprāvartata nadī tatra keśaśaivalaśādvalāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें