महाभारत 6.89.3तालमात्राणि चापानि विकर्षन्तो महाबलाःतमेकमभ्यधावन्त नदन्तः सिंहसंघवत्tālamātrāṇi cāpāni vikarṣanto mahābalāḥtamekamabhyadhāvanta nadantaḥ siṃhasaṃghavatइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें