महाभारत 6.9.16
अष्टचक्रं हि तद्यानं भूतयुक्तं मनोजवम्अग्निवर्णं महावेगं जाम्बूनदपरिष्कृतम्
aṣṭacakraṃ hi tadyānaṃ bhūtayuktaṃ manojavamagnivarṇaṃ mahāvegaṃ jāmbūnadapariṣkṛtam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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