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महाभारत 6.9.2
संजय उवाच · saṃjaya uvāca
दक्षिणेन तु श्वेतस्य नीलस्यैवोत्तरेण तुवर्षं रमणकं नाम जायन्ते तत्र मानवाः
dakṣiṇena tu śvetasya nīlasyaivottareṇa tuvarṣaṃ ramaṇakaṃ nāma jāyante tatra mānavāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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