महाभारत 6.9.4दश वर्षसहस्राणि शतानि दश पञ्च चजीवन्ति ते महाराज नित्यं मुदितमानसाःdaśa varṣasahasrāṇi śatāni daśa pañca cajīvanti te mahārāja nityaṃ muditamānasāḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें