महाभारत 6.91.26
प्रभिन्नाश्च महानागा विनीता हस्तिसादिभिःपरस्परं समासाद्य संनिपेतुरभीतवत्
prabhinnāśca mahānāgā vinītā hastisādibhiḥparasparaṃ samāsādya saṃnipeturabhītavat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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