महाभारत 6.91.2तस्य सर्वं यथावृत्तमाख्यातुमुपचक्रमेघटोत्कचस्य विजयमात्मनश्च पराजयम्tasya sarvaṃ yathāvṛttamākhyātumupacakrameghaṭotkacasya vijayamātmanaśca parājayamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें