महाभारत 6.91.40
उत्तमास्त्राणि दिव्यानि दर्शयन्तो महाबलाःतमेकं कुञ्जरं क्रुद्धाः समन्तात्पर्यवारयन्
uttamāstrāṇi divyāni darśayanto mahābalāḥtamekaṃ kuñjaraṃ kruddhāḥ samantātparyavārayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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